राकेश शर्मा (समाचार हिमाचल) 23 सितम्बर
हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का बोझ ₹1.10 लाख करोड़ के पार पहुंचने के बीच प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष नूरपुर राजेश काका ने सुक्खू सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने अपने तीन वित्तीय वर्षों में ₹35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है। भाजपा के अनुसार, यह आंकड़ा मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए लिखित उत्तर में सामने आया है।
भाजपा ने कहा कि 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश का बकाया ऋण ₹1,01,863 करोड़ पहुंच चुका था और अब यह आंकड़ा ₹1.10 लाख करोड़ के पार जा चुका है। ऐसे में भाजपा ने सरकार से सवाल किया है कि इतनी बड़ी राशि उधार लेने के बाद प्रदेश में कितने नए उद्योग लगे, कितने बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान बने, कितने स्थायी रोजगार पैदा हुए और प्रदेश की आय बढ़ाने वाली कितनी नई परिसंपत्तियां तैयार हुईं।
राजेश काका ने कहा कि कर्ज लेने की रफ्तार चालू वित्त वर्ष में भी जारी है। उनके अनुसार, जुलाई 2026 तक सरकार ₹2,800 करोड़ का ऋण उठा चुकी थी। इसमें अप्रैल में ₹900 करोड़, मई में ₹500 करोड़, जून में ₹400 करोड़ और ₹300 करोड़ तथा जुलाई में ₹700 करोड़ की अतिरिक्त उधारी शामिल थी।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की आर्थिक नीति “कर्ज लो, खर्च चलाओ और अगली पीढ़ी पर बोझ छोड़ जाओ” बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार पिछली सरकार को प्रदेश की वित्तीय स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद वर्तमान सरकार को अपने कार्यकाल में ली गई उधारी का भी हिसाब देना होगा।
राजेश काका ने कहा कि सरकार यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि पुराने कर्ज की किस्तें चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं यह तर्क दे चुके हैं कि पूर्व सरकार से मिले ऋण की किस्तें चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को नया ऋण उठाना पड़ रहा है। हालांकि, भाजपा का कहना है कि इससे यह सवाल खत्म नहीं होता कि प्रदेश की आय बढ़ाने और कर्ज पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि कर्ज का आंकड़ा केवल सरकारी खातों तक सीमित विषय नहीं है। इसका असर आने वाले वर्षों के बजट, विकास कार्यों और प्रदेश की अगली पीढ़ी पर भी पड़ेगा। ऐसे में भाजपा ने सरकार से मांग की है कि दिसंबर 2022 से अब तक की पूरी ऋण स्थिति को सार्वजनिक किया जाए और बताया जाए कि नई उधारी में से कितना पैसा पुराने कर्ज की अदायगी में गया तथा कितना विकास और पूंजीगत निर्माण पर खर्च हुआ।
राजेश काका ने कहा कि सरकार को अब केवल यह बताने के बजाय कि कर्ज क्यों लेना पड़ा, यह भी बताना चाहिए कि उस कर्ज से प्रदेश में क्या बदला। उन्होंने ऋण, ब्याज भुगतान, विकास कार्यों और तैयार हुई परिसंपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।
भाजपा के मुताबिक, प्रदेश के सामने असली सवाल कर्ज लेने का ही नहीं, बल्कि कर्ज के बदले पैदा हुई आर्थिक क्षमता का है। आने वाले समय में यही देखा जाएगा कि बढ़ते ऋण के साथ हिमाचल की अपनी आय और स्थायी परिसंपत्तियां कितनी बढ़ती हैं।
